Delhi Excise Policy Case: केजरीवाल-सिसोदिया को 4 हफ्ते का समय, 5-6 अक्टूबर को CBI की याचिका पर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट में फिर गरमाया दिल्ली शराब नीति मामला
Delhi Excise Policy Case में सोमवार, 17 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य प्रतिवादियों को CBI की ओर से दाखिल अतिरिक्त लिखित दलीलों पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने मामले में CBI की रिवीजन याचिका पर व्यापक बहस के लिए 5 और 6 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।
CBI की 103 पन्नों की दलीलों पर मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि CBI ने हाल ही में करीब 103 पन्नों की लिखित दलीलें दाखिल की हैं।
उनका कहना था कि इन दलीलों में कुछ ऐसे नए आधार और सामग्री शामिल हैं, जो मूल रिवीजन याचिका का हिस्सा नहीं थे।
उन्होंने यह भी बताया कि CBI ने अपनी लिखित दलीलों के साथ दो एनेक्सचर यानी संलग्न दस्तावेज भी दाखिल किए हैं। इसलिए बचाव पक्ष को उनका जवाब देने का अवसर मिलना चाहिए।
क्या है CBI की रिवीजन याचिका?
CBI ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 27 फरवरी 2026 को आबकारी नीति मामले में 23 आरोपियों को डिस्चार्ज किया गया था।
CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने मामले में मौजूद महत्वपूर्ण सामग्री और साक्ष्यों पर उचित विचार नहीं किया।
अब केंद्रीय जांच एजेंसी हाईकोर्ट से उस डिस्चार्ज आदेश को चुनौती दे रही है।
केजरीवाल-सिसोदिया ने क्या आपत्ति जताई?
केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य प्रतिवादियों ने CBI की रिवीजन याचिका की maintainability यानी कानूनी स्वीकार्यता पर भी प्रारंभिक आपत्तियां उठाई हैं।
उनकी ओर से यह दलील दी गई है कि CBI की याचिका को पहले कानूनी रूप से परखा जाना चाहिए कि क्या वह वास्तव में रिवीजन याचिका के रूप में सुनवाई योग्य है।
मनीष सिसोदिया और केजरीवाल ने अलग-अलग आवेदन दाखिल कर CBI की याचिका खारिज करने की मांग भी की है।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसने प्रतिवादियों की प्रारंभिक आपत्तियों को नोट कर लिया है, लेकिन वह उन्हें अलग-अलग चरणों में सुनना नहीं चाहती।
पीठ ने कहा कि यह अदालत तय करेगी कि प्रारंभिक आपत्तियों पर कब सुनवाई करनी है और इन्हें आगे की कार्यवाही की शर्त नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रतिवादियों को पहले CBI की रिवीजन याचिका पर अपने जवाब दाखिल करने चाहिए थे।
अदालत ने टिप्पणी की कि प्रतिवादी अपनी पसंद के अनुसार केवल प्रारंभिक आपत्ति दाखिल करके बाकी जवाब से नहीं बच सकते।
अक्टूबर में शुरू होगी CBI की मुख्य बहस
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब 5 और 6 अक्टूबर को CBI की रिवीजन याचिका पर मुख्य दलीलें सुनने के लिए मामला सूचीबद्ध किया है।
प्रतिवादियों को CBI की अतिरिक्त लिखित सामग्री पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह दिए गए हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके बाद अतिरिक्त सामग्री स्वीकार नहीं की जाएगी।
फरवरी में 23 आरोपी हुए थे डिस्चार्ज
इस मामले में बड़ा मोड़ फरवरी 2026 में आया था, जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य समेत कुल 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था।
ट्रायल कोर्ट के इस आदेश के बाद CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और डिस्चार्ज आदेश को चुनौती दी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि डिस्चार्ज को बरी (acquittal) समझना सही नहीं है। दोनों कानूनी स्थितियों में अंतर होता है। इस मामले में CBI की चुनौती पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।
CBI और बचाव पक्ष की दलीलों में क्या अंतर है?
CBI का पक्ष
CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने मामले में उपलब्ध महत्वपूर्ण सामग्री पर पर्याप्त विचार नहीं किया और डिस्चार्ज का आदेश कानूनी रूप से गलत है।
केजरीवाल-सिसोदिया का पक्ष
बचाव पक्ष CBI की रिवीजन याचिका की maintainability पर सवाल उठा रहा है और यह भी कह रहा है कि एजेंसी की चुनौती में ऐसे बिंदु शामिल हैं जो मूल डिस्चार्ज आदेश में कथित कानूनी त्रुटि को पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं करते।
अदालत को अब दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुननी हैं।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल अगला महत्वपूर्ण चरण प्रतिवादियों द्वारा CBI की अतिरिक्त लिखित दलीलों पर जवाब दाखिल करना है।
इसके बाद अक्टूबर में CBI की मुख्य बहस शुरू होगी।
अदालत के सामने मुख्य सवालों में यह भी शामिल होगा कि CBI की रिवीजन याचिका किस सीमा तक सुनवाई योग्य है और क्या ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश में ऐसी कानूनी त्रुटि है जिसके आधार पर हाईकोर्ट उसमें हस्तक्षेप करे।
निष्कर्ष
Delhi Excise Policy Case एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट में अहम मोड़ पर पहुंच गया है। कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य प्रतिवादियों को CBI की अतिरिक्त दलीलों पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह दिए हैं।
अब 5 और 6 अक्टूबर 2026 को इस मामले में CBI की मुख्य दलीलें सुनी जाएंगी।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हाईकोर्ट मामले में क्या फैसला देगा। अदालत की आगामी सुनवाई इस बात पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है कि फरवरी में आरोपियों को डिस्चार्ज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को आगे बरकरार रखा जाता है या CBI की चुनौती पर कोई हस्तक्षेप होता है।
FAQs
दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में 17 अगस्त 2026 को क्या हुआ?
दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य प्रतिवादियों को CBI की अतिरिक्त लिखित दलीलों पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
अगली महत्वपूर्ण सुनवाई कब होगी?
CBI की रिवीजन याचिका पर मुख्य दलीलों की सुनवाई 5 और 6 अक्टूबर 2026 को होगी।
CBI ने हाईकोर्ट का रुख क्यों किया?
CBI ने फरवरी 2026 में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा 23 आरोपियों को डिस्चार्ज किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।
क्या केजरीवाल और सिसोदिया बरी हो चुके हैं?
नहीं। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को डिस्चार्ज किया था। CBI ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है और मामला अभी न्यायिक विचाराधीन है।
केजरीवाल और सिसोदिया की मुख्य आपत्ति क्या है?
उन्होंने CBI की रिवीजन याचिका की maintainability यानी कानूनी स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्तियां उठाई हैं।
