पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा इन दिनों राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के तीखे आक्रोश का सामना कर रहे हैं। राज्य भर में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, जैसे ‘सांझा मुलाजिम मंच’ और ‘पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट’ द्वारा लगातार प्रदर्शन, पेन-डाउन स्ट्राइक और विरोध रैलियां आयोजित की जा रही हैं। इस व्यापक असंतोष का मुख्य कारण Harpal Singh Cheema Punjab Employee Protest के रूप में उभरकर सामने आया है, जिसमें कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते (DA), पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का अधूरा वादा, छठे वेतन आयोग की विसंगतियां और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण में हो रही देरी शामिल है।
पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी ने कर्मचारियों से कई बड़े और लोकलुभावन वादे किए थे। हालांकि, दो साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जब ये वादे धरातल पर पूरी तरह से नहीं उतरे, तो कर्मचारियों का सब्र टूट गया। वित्त मंत्रालय का प्रभार संभालने के नाते हरपाल सिंह चीमा को इस प्रशासनिक और वित्तीय गतिरोध का मुख्य चेहरा माना जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य सरकार मुफ़्त योजनाओं के लिए बजट आवंटित कर रही है, लेकिन राज्य के प्रशासनिक ढांचे को चलाने वाले कर्मचारियों के वैध वित्तीय अधिकारों और बकाए का भुगतान करने से कतरा रही है।
📌 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- महंगाई भत्ते (DA) का बकाया: पंजाब के कर्मचारियों का केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में 12% से अधिक DA पेंडिंग है।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर संशय: नवंबर 2022 में नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद OPS के लिए नियमावली (SOPs) जारी नहीं की गई है।
- छठे वेतन आयोग की विसंगतियां: पे-मैट्रिक्स और एरियर के भुगतान में देरी को लेकर कर्मचारियों में भारी निराशा है।
- कच्चे कर्मचारियों का मुद्दा: 30,000 से अधिक संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को पक्का करने की प्रक्रिया अत्यंत धीमी है।
- वित्तीय संकट का तर्क: वित्त मंत्री चीमा राज्य पर करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का हवाला दे रहे हैं, जिसे यूनियनें कुप्रबंधन बता रही हैं।
Harpal Singh Cheema Punjab Employee Protest — पूरी पृष्ठभूमि और मुख्य कारण
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कर्मचारियों के गुस्से को समझने के लिए हमें राज्य के वर्तमान आर्थिक परिदृश्य और चुनावी घोषणाओं का विस्तार से विश्लेषण करना होगा। आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले राज्य के सरकारी तंत्र को मजबूत करने और पारदर्शी प्रशासन देने का वादा किया था। हालांकि, समय बीतने के साथ वित्त विभाग और कर्मचारी संगठनों के बीच दूरियां बढ़ती गईं।
1. महंगाई भत्ते (DA) और बकाए (Arrears) की किश्तें रोकना
पंजाब सरकार के कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) की लंबित किश्तों को लेकर है। केंद्र सरकार जहां अपने कर्मचारियों को 50% से अधिक डीए दे रही है, वहीं पंजाब के कर्मचारियों को काफी कम दर पर भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य सरकार पिछले 3-4 वर्षों के बकाए एरियर का भुगतान नहीं कर रही है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बार-बार आश्वासन दिया कि किश्तें जारी की जाएंगी, लेकिन बजट की तंगी का हवाला देकर तारीखें आगे बढ़ाई जाती रहीं।
2. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की सिर्फ कागजी घोषणा
गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी ने पंजाब में पुरानी पेंशन योजना लागू करने का बड़ा प्रचार किया था। पंजाब सरकार ने नवंबर 2022 में ओपीएस लागू करने का कैबिनेट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया। लेकिन दो साल बाद भी स्थिति जस की तस है। कर्मचारी संगठन बताते हैं कि सरकार ने न तो PFRDA से अपना फंड वापस लेने की ठोस रणनीति बनाई है और न ही नई नियमावली लागू की है। वर्तमान में जो नए कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उन्हें अभी भी एनपीएस (NPS) के तहत ही पेंशन दी जा रही है, जिसे कर्मचारी धोखा मान रहे हैं।
3. छठे वेतन आयोग (6th Pay Commission) की त्रुटियां
पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किए गए छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने का वादा आप सरकार ने किया था। पे-मैट्रिक्स में 2.59 और 2.72 के मल्टीप्लायर फैक्टर को लेकर विभिन्न कैडरों में भारी अंतर है। इसके अलावा, वेतन आयोग के बकाए (Arrears) का भुगतान किश्तों में करने की बात कही गई थी, लेकिन वह प्रक्रिया भी ठप पड़ी है। पैरामेडिकल स्टाफ, शिक्षक और लिपिक वर्गीय कर्मचारी इसके सीधे शिकार हुए हैं।
4. संविदा (Contractual) कर्मचारियों को पक्का न करना
भगवंत मान सरकार ने 28,000 से 35,000 कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था। हालांकि, कानूनी और तकनीकी अड़चनों के कारण बड़े पैमाने पर कर्मचारी अभी भी आउटसोर्सिंग या अनुबंध के तहत काम करने को मजबूर हैं। उनका वेतन बेहद कम है और वे समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।
तुलनात्मक विश्लेषण और प्रमुख आंकड़े
पंजाब के कर्मचारियों की मांगों और सरकार के वर्तमान रुख के बीच के अंतर को समझने के लिए निम्नलिखित तालिका एक स्पष्ट तस्वीर पेश करती है:
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| कर्मचारी मांग का विषय | कर्मचारी यूनियनों की मांग | पंजाब सरकार / व%B
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