
नई दिल्ली/सैन फ्रांसिस्को (12 मई 2026)
कांग्रेस के दिग्गज नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक डिबेट में थरूर ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य को वर्तमान स्वरूप में संभालना लगभग असंभव होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ही मुख्यमंत्री के लिए 20 करोड़ से अधिक की आबादी वाले राज्य का प्रभावी ढंग से नेतृत्व करना प्रशासनिक सीमाओं से परे है।
थरूर ने अपनी बात को मजबूती देने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती के उस पुराने प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश को चार अलग-अलग राज्यों— *पूर्वांचल, पश्चिम प्रदेश, बुंदेलखंड और अवध प्रदेश* में बांटने की सिफारिश की थी। थरूर के अनुसार, छोटे राज्य प्रशासनिक दृष्टि से अधिक कुशल होते हैं और वहां की जनता तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बेहतर तरीके से हो पाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूपी की आबादी अब दुनिया के कई विकसित और बड़े देशों से भी अधिक हो चुकी है, जो शासन व्यवस्था पर भारी दबाव डालती है।
जनसंख्या के मुद्दे पर थरूर ने दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ रही है, जबकि दक्षिण भारत ने इसे सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। थरूर ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में संसदीय सीटों का परिसीमन (Delimitation) केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो यह उन राज्यों के साथ “राजनीतिक अन्याय” होगा जिन्होंने राष्ट्रहित में अपनी आबादी कम की है। उन्होंने इसे एक प्रकार का ‘राजनीतिक विमुद्रीकरण’ करार दिया, जिससे दक्षिण भारत के लोग खुद को देश की मुख्यधारा की राजनीति में अप्रासंगिक महसूस कर सकते हैं।
इस चर्चा के दौरान भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने थरूर के तर्कों का जवाब देते हुए जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और प्रतिनिधित्व का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। हालांकि, थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी चिंता विकास और शासन की गुणवत्ता को लेकर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूपी जैसे बड़े राज्य का विभाजन न केवल वहां के निवासियों के लिए बेहतर विकास के द्वार खोलेगा, बल्कि देश के संघीय ढांचे में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में भी मददगार साबित होगा।

