उमर खालिद ने जेल में बिताए 6 साल पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘इंसानियत भी एक विशेषाधिकार बन गई है’

Umar Khalid Interview

उमर खालिद ने जेल में बिताए 6 साल पर पहली बार की खुलकर बात

करीब छह वर्षों से जेल में बंद छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद ने अपने पहले सार्वजनिक इंटरव्यू में जेल के अनुभव, मानसिक स्थिति और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। यह इंटरव्यू ब्रिटेन के समाचार पत्र The Guardian में प्रकाशित हुआ है।

उमर खालिद सितंबर 2020 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है। उन्होंने सभी आरोपों से लगातार इनकार किया है। मामले की सुनवाई अभी भी लंबित है और अदालत ने अभी तक दोष या निर्दोष होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

“हर शाम कैद का एहसास और गहरा हो जाता है”

इंटरव्यू में उमर खालिद ने कहा कि जेल में सबसे कठिन समय शाम का होता है। उन्होंने रूसी लेखक फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की की जेल डायरी का जिक्र करते हुए कहा कि हर दिन का अंत यह एहसास कराता है कि जीवन का एक और दिन कैद में बीत गया।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक जेल में रहने से मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

“इंसानियत भी एक विशेषाधिकार बन गई है”

उमर खालिद ने कहा कि उनके अनुसार लगातार प्रचार और राजनीतिक आरोपों के कारण उन्हें एक इंसान के बजाय केवल एक छवि के रूप में देखा जाने लगा है।

उन्होंने कहा,

“जब किसी व्यक्ति को केवल एक सकारात्मक या नकारात्मक छवि तक सीमित कर दिया जाता है, तो उसकी इंसानियत भी पीछे छूट जाती है।”

सरकार और लोकतंत्र पर जताई चिंता

इंटरव्यू के दौरान उमर खालिद ने देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने आरोप लगाया कि नफरत फैलाने वाली भाषा और गलत सूचनाओं का सामान्यीकरण लोकतंत्र के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार पहले भी इन आरोपों को खारिज करती रही है। सरकार का कहना है कि भारत की न्यायपालिका स्वतंत्र है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार संचालित होती हैं।

लंबित है कानूनी मामला

दिल्ली पुलिस का आरोप है कि उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश में शामिल थे। वहीं उमर खालिद इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते रहे हैं।

अब तक उन्हें कई बार जमानत नहीं मिल सकी है और मामला अदालत में विचाराधीन है।

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उमर खालिद के लंबे समय तक ट्रायल शुरू न होने पर चिंता जताई है। वहीं सरकार का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र है और अदालत अपने स्तर पर निर्णय ले रही है।

निष्कर्ष

उमर खालिद का यह इंटरव्यू एक बार फिर भारत में लोकतंत्र, न्यायिक प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक मामलों पर नई बहस छेड़ सकता है। हालांकि उनके खिलाफ दर्ज मामला अभी अदालत में लंबित है और अंतिम फैसला आना बाकी है। ऐसे में इस पूरे मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही देखा जाना चाहिए।

FAQs

उमर खालिद कब से जेल में हैं?

वे सितंबर 2020 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

उन पर कौन से आरोप हैं?

उन पर 2020 दिल्ली दंगों की कथित साजिश और UAPA सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है। उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।

क्या अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है?

नहीं। मामला अभी विचाराधीन है और अंतिम फैसला नहीं आया है।

यह इंटरव्यू कहां प्रकाशित हुआ?

यह इंटरव्यू ब्रिटेन के समाचार पत्र The Guardian में प्रकाशित हुआ है।

 

 

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