‘सतलुज’ विवाद: दिलजीत दोसांझ और ZEE5 के खिलाफ FIR की मांग, फिल्म पर आतंकवाद का महिमामंडन करने का आरोप
Satluj Film Controversy: अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर विवादों में घिर गई है। फिल्म को लेकर वकील विनीत जिंदल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) में शिकायत दर्ज कराते हुए अभिनेता दिलजीत दोसांझ, फिल्म के निर्देशक और OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववादी विचारधारा के प्रति सहानुभूति दिखाती है तथा पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद से जुड़े घटनाक्रमों को विवादित तरीके से प्रस्तुत करती है।
गृह मंत्रालय में शिकायत
वकील विनीत जिंदल ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि फिल्म देश में गलत जानकारी फैलाती है और आतंकवाद से जुड़े नैरेटिव को बढ़ावा दे सकती है।
उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है।
FIR की मांग क्यों की गई?
शिकायत में कहा गया है कि फिल्म:
- आतंकवाद और उग्रवाद के प्रति सहानुभूति पैदा कर सकती है।
- अलगाववादी विचारधारा का महिमामंडन करती प्रतीत होती है।
- ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है।
- सुरक्षा बलों, पुलिसकर्मियों और निर्दोष नागरिकों के बलिदान को कमतर दिखा सकती है।
- सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डाल सकती है।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि फिल्म के कुछ दृश्य खालिस्तानी आतंकवाद से जुड़े नैरेटिव को उचित ठहराने की कोशिश करते हैं।
ZEE5 से क्यों हटाई गई फिल्म?
फिल्म ‘Satluj’ को रिलीज़ के एक दिन बाद ही ZEE5 से हटा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, फिल्म के कुछ हिस्सों को लेकर यह आशंका जताई गई कि उनका इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतें अपने प्रचार के लिए कर सकती हैं। इसी वजह से समीक्षा के बाद फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला लिया गया।
CBFC को लेकर भी उठे सवाल
यह फिल्म पहले ‘Punjab 95’ नाम से बनाई गई थी।
निर्माताओं का दावा है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म में 127 कट लगाने की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि थिएटर रिलीज़ के लिए CBFC की आपत्तियों को पूरी तरह स्वीकार करने के बजाय फिल्म का नाम बदलकर ‘Satluj’ रखा गया और इसे सीधे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ कर दिया गया।
फिल्म किस पर आधारित है?
‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित बताई जाती है।
खालड़ा पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ों और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों को उजागर करने के लिए जाने जाते थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
फिल्म हटाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि फिल्म को हटाने से लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई है।
वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने इसे पंजाब के इतिहास से जुड़ा मुद्दा बताया।
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि फिल्म जिन घटनाओं पर आधारित है, उन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पहले टिप्पणी कर चुका है।
दूसरी ओर, दिलजीत दोसांझ ने फिल्म हटाए जाने पर निराशा जताते हुए कहा कि जिस अन्याय को फिल्म में दिखाया गया है, उसी तरह फिल्म के साथ भी व्यवहार किया गया।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल शिकायत गृह मंत्रालय के पास है। अभी तक इस मामले में किसी एजेंसी ने FIR दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
फिल्म को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों या संबंधित अधिकारियों के फैसले के बाद ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
FAQ
‘सतलुज’ फिल्म क्यों विवादों में है?
फिल्म पर आतंकवाद और अलगाववादी विचारधारा के प्रति सहानुभूति दिखाने के आरोप लगाए गए हैं।
किसने शिकायत दर्ज कराई है?
वकील विनीत जिंदल ने गृह मंत्रालय में शिकायत दर्ज कर FIR की मांग की है।
फिल्म ZEE5 से क्यों हटाई गई?
सूत्रों के अनुसार, फिल्म के कुछ हिस्सों के दुरुपयोग की आशंका के चलते इसे प्लेटफॉर्म से हटाया गया।
फिल्म किस पर आधारित है?
फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है।
