
रुद्रप्रयाग (24 अप्रैल 2026)
उत्तराखंड के पवित्र त्रियुगीनारायण मंदिर में एक ऐसी शादी संपन्न हुई, जिसने समाज के सामने सादगी और आदर्श की अनूठी मिसाल पेश की है। हरियाणा में कार्यरत एक महिला जज और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक वकील ने बिना किसी तामझाम और दहेज के, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल पर सात फेरे लिए। इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें फिजूलखर्ची को पूरी तरह त्याग कर केवल धार्मिक रीति-रिवाजों और सादगी को प्राथमिकता दी गई।
हरियाणा न्यायिक सेवा में कार्यरत जज और पेशे से वकील दूल्हे ने अपनी शादी के लिए किसी आलीशान होटल या रिजॉर्ट के बजाय रुद्रप्रयाग जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर को चुना। मान्यता है कि त्रेता युग में इसी स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जिसकी साक्षी यहाँ की अखंड धूनी आज भी दे रही है। इसी पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर इस शिक्षित जोड़े ने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की।
समाज में पैर पसार रही दहेज जैसी कुप्रथा पर कड़ा प्रहार करते हुए, इस जोड़े ने स्पष्ट संदेश दिया कि विवाह दो आत्माओं का मिलन है, न कि धन-दौलत के प्रदर्शन का जरिया। वर और वधू पक्ष की ओर से केवल गिने-चुने पारिवारिक सदस्य ही इस समारोह में शामिल हुए। दूल्हे और दुल्हन ने बताया कि वे युवाओं को यह संदेश देना चाहते थे कि सादगी से किया गया कार्य अधिक शांतिपूर्ण और अर्थपूर्ण होता है।
इस विवाह ने स्थानीय लोगों और मंदिर दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं का भी ध्यान खींचा। लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना की और कहा कि जब उच्च पदों पर बैठे व्यक्ति इस तरह की सादगी अपनाते हैं, तो समाज के अन्य वर्गों के लिए भी एक प्रेरणा बनती है। मंदिर के तीर्थ पुरोहितों ने विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया और नवदम्पति को उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।
यह विवाह न केवल अपनी सादगी के लिए चर्चा में है, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते आकर्षण को भी दर्शाता है। इस दहेज रहित विवाह की चर्चा अब सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में खूब हो रही है, जहाँ लोग इसे एक प्रगतिशील समाज की ओर बढ़ता कदम बता रहे हैं।

