
नई दिल्ली/पोर्ट लुईस, 16 अप्रैल 2026
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने *9वें हिंद महासागर सम्मेलन (Indian Ocean Conference)* और हालिया अंतरराष्ट्रीय बैठकों के दौरान वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और लाल सागर (Red Sea) व होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर बढ़ते हमलों के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी समुद्री व्यापारिक लाइनों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
### *प्रमुख बातें और जयशंकर के कड़े रुख के बिंदु:*
* *समुद्री सुरक्षा पर सख्त चेतावनी:* जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग किसी एक देश की जागीर नहीं हैं। वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और नेविगेशन की स्वतंत्रता में बाधा डालना ‘समुद्र में गुंडागर्दी’ (Hooliganism at sea) के समान है, जिसे भारत मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगा।
* *ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता:* उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की ऊर्जा ज़रूरतें (तेल और गैस की आपूर्ति) पश्चिम एशिया पर बहुत हद तक निर्भर हैं। आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह की बाधा भारतीय उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है, जिसे रोकना सरकार की प्राथमिकता है।
* *भारतीय नौसेना की मुस्तैदी:* जयशंकर ने संकेत दिया कि भारतीय नौसेना अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है ताकि भारतीय ध्वज वाले जहाजों और समुद्री चालक दल (Seafarers) को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
—
### *ऊर्जा संकट और वैश्विक समीकरण*
विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि दुनिया इस समय एक जटिल दौर से गुजर रही है जहाँ संसाधनों के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा है।
1. *बाजार में विकृति:* उन्होंने पश्चिमी देशों और अन्य वैश्विक शक्तियों को आईना दिखाते हुए कहा कि सिद्धांतों को चुनिंदा रूप से लागू किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा बाजार विकृत हो रहा है।
2. *आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन:* जयशंकर ने ‘AZEC Plus’ बैठक में कहा कि भारत समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर ऐसी ‘सप्लाई चेन’ बनाना चाहता है जो युद्ध या संकट के समय भी न टूटे।
3. *मॉरीशस के साथ सहयोग:* संकट के इसी दौर में भारत ने मॉरीशस को तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक सरकारी समझौते (G2G Agreement) को अंतिम रूप दिया है।
—
### *निष्कर्ष: ‘भारत प्रथम’ की नीति*
जयशंकर का यह बयान भारत की उभरती हुई उस विदेश नीति को दर्शाता है जहाँ भारत अब केवल सुझाव देने वाला देश नहीं, बल्कि समुद्री क्षेत्र में एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ (Net Security Provider) के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
> “जब ऊर्जा दुर्लभ और महंगी हो जाती है, तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। हमारा राष्ट्रीय हित, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार प्रवाह शामिल है, हमेशा सर्वोपरि रहेगा।” — *एस. जयशंकर*
यह खबर ऐसे समय में आई है जब ईरान-इजरायल तनाव और अन्य क्षेत्रीय संघर्षों के कारण तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए नए और सुरक्षित रास्ते तलाश रहा है।

