₹10 लाख तक का कैशलेस कवर, जन्म के पहले घंटों से ही मां और नवजात को मिल रही जीवनरक्षक सुविधा

चंडीगढ़, 8 अप्रैल

मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के शुभारंभ के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann ने कहा था, “इलाज की चिंता करें, बिल की नहीं। सरकार आपकी जेब बनेगी।” अबोहर की चार महीने की बच्ची दिलजोत के परिवार के लिए ये शब्द हकीकत बन गए हैं।

राशप्रीत कौर और भारत कुमार की बेटी दिलजोत को गंभीर संक्रमण और वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) यानी दिल में छेद की बीमारी का पता चला। माता-पिता उसे इलाज के लिए बठिंडा ले गए, जहां उनका पूरा ध्यान केवल बच्ची की जान बचाने पर था। इलाज का खर्च बहुत अधिक था, लेकिन मुख्यमंत्री सेहत योजना ने पूरी मदद की।

दिलजोत को 24 घंटे निगरानी सहित विशेष उपचार मिला और परिवार को एक भी दिन खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ी। उसके पिता भारत कुमार, जो अबोहर में एक छोटा सैलून चलाते हैं, ने बताया, “डॉक्टरों ने कहा कि मेरी बेटी के दिल में छेद है। उसका दो अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हुआ और ₹2.77 लाख का पूरा खर्च सेहत कार्ड से कवर हो गया।”

मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann के नेतृत्व में यह योजना सुनिश्चित करती है कि किसी भी परिवार को इलाज और आर्थिक तंगी के बीच चुनाव न करना पड़े। इस योजना के तहत हर मां और नवजात को सालाना ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज सरकारी और पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में मिल सकता है, वह भी जन्म के शुरुआती घंटों से।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री Dr. Balbir Singh ने कहा कि गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि लोग समय पर जांच कराएं और इलाज में देरी न करें। पिछले तीन महीनों में ही 6,000 से अधिक नवजातों का इलाज इस योजना के तहत किया गया है, जो इसकी बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।

यह योजना कम वजन, समय से पहले जन्म, संक्रमण, पीलिया और सांस संबंधी समस्याओं जैसी बीमारियों के इलाज को कवर करती है और मातृ व प्रसवोत्तर स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत कर रही है।

दिलजोत का मामला अकेला नहीं है। पूरे पंजाब में अब परिवार अपने नवजात बच्चों को शुरुआती दिनों में ही अस्पताल लेकर आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा है कि इलाज का खर्च उन्हें नहीं उठाना पड़ेगा।

बठिंडा के अग्रवाल अस्पताल में गंभीर पीलिया और सांस की तकलीफ से जूझ रहे एक नवजात का करीब ₹1 लाख का इलाज भी इस योजना के तहत पूरी तरह कवर किया गया।

इसी तरह पटियाला के गढ़ाया गांव के नवजात मनकीरत सिंह को पीलिया और सांस की समस्या के लिए इलाज की जरूरत पड़ी। उसके पिता बलविंदर सिंह ने कहा, “हम बच्चे की सेहत को लेकर चिंतित थे, लेकिन बिल की चिंता ज्यादा थी। मुख्यमंत्री मान की योजना की बदौलत पूरा खर्च कवर हो गया।”

फरीदकोट के कोटकपूरा की बिमला रानी के नवजात बच्चे को भी विशेष देखभाल की जरूरत पड़ी और उसका इलाज मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत चल रहा है।

ये उदाहरण एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाते हैं। योजना शुरू होने के बाद अब अधिक परिवार जन्म के पहले 72 घंटों के भीतर ही अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम मिल रहे हैं और जटिलताओं में कमी आ रही है।

पंजाब सरकार लोगों से अपील कर रही है कि वे सेहत कार्ड के लिए नामांकन करें, ताकि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकें।

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