
चंडीगढ़, 3 अप्रैल:
आगामी उच्च संक्रमण सीजन से पहले जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और वित्त व परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य राज्यभर में वेक्टर जनित, जलजनित और जूनोटिक बीमारियों के खिलाफ एकीकृत रणनीति तैयार करना था।
बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, रेबीज और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए “वन हेल्थ” दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि राज्य ने अपनी डायग्नोस्टिक व्यवस्था को मजबूत किया है और अब 47 सेंटिनल सर्विलांस अस्पतालों में डेंगू और चिकनगुनिया की मुफ्त ELISA जांच उपलब्ध है, जबकि सभी आम आदमी क्लीनिकों में मलेरिया RDT और डेंगू परीक्षण की सुविधा दी गई है।
विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2021 में 23,389 मामलों की तुलना में 2025 में यह संख्या घटकर 4,981 रह गई है, जबकि मौतों की संख्या 55 से घटकर मात्र 8 रह गई है। उन्होंने कहा कि यह कमी घर-घर सर्वेक्षण और पिछले सीजन में किए गए 1.5 करोड़ दौरे के कारण संभव हुई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि “हर शुक्रवार डेंगू पर वार” अभियान को जन आंदोलन बनाया जाए। यह अभियान हर शुक्रवार सुबह 8 से 9 बजे तक चलाया जाता है, जिसमें स्कूलों के छात्र और शिक्षक भी शामिल होकर कूलर, गमलों और पानी की टंकियों में जमा पानी जैसे मच्छरों के पनपने वाले स्थानों की पहचान कर उन्हें खत्म करेंगे। उन्होंने चिंता जताई कि जहां पहले डेंगू शहरी क्षेत्रों तक सीमित था, वहीं अब 2025 में 42% मामले ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आए हैं। ऐसे में गांवों में फॉगिंग, लार्वीसाइड छिड़काव और तालाबों में गैंबूसिया मछली छोड़ने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
जूनोटिक बीमारियों पर चर्चा करते हुए मंत्री ने राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य के 746 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है और कुत्तों में 70% प्रतिरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर एनिमल बर्थ कंट्रोल सुविधाओं को जल्द स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत IHIP पोर्टल के माध्यम से रोगों की रियल-टाइम रिपोर्टिंग की जा रही है। उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से भी अपील की कि निजी चिकित्सक सभी सूचित बीमारियों की जानकारी तुरंत साझा करें।
जलजनित बीमारियों को लेकर चिंता जताते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने स्थानीय निकाय और जल आपूर्ति विभाग को निर्देश दिए कि पीने के पानी का 100% क्लोरीनीकरण सुनिश्चित किया जाए और विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित सैंपलिंग की जाए, ताकि हेपेटाइटिस A, E, डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों को रोका जा सके।
फिरोजपुर जिले के हजारा सिंह वाला गांव में हाल ही में फैले लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वह स्वयं उपायुक्त के साथ गांव का दौरा करेंगे और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी।
वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आश्वासन दिया कि इस दिशा में वित्त विभाग पूरा सहयोग देगा। उन्होंने बताया कि पंजाब रोडवेज और PRTC वर्कशॉप्स को कबाड़ टायर और पुराने वाहन पार्ट्स का समय पर निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि ये मच्छरों के पनपने के प्रमुख स्थान होते हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य कुमार राहुल, पंजाब विकास आयोग के सदस्य अनुराग कुंदू, एमडी PHSC अमित तलवार, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव मंजीत सिंह बराड़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशक डॉ. हितिंदर कौर, परिवार कल्याण निदेशक डॉ. अदिति सलारिया, (ESI) निदेशक डॉ. अनिल कुमार गोयल, उपनिदेशक डॉ. मंजू बंसल, सहायक निदेशक डॉ. मनमीत कौर, राज्य कार्यक्रम अधिकारी NVBDCP डॉ. अर्शदीप कौर, डॉ. प्रभलीन कौर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
