India Turkey Relations: क्यों भारत से दोस्ती की बात कर रहा है तुर्की?
एक समय पाकिस्तान के सबसे करीबी समर्थकों में शामिल तुर्की अब भारत के साथ संबंध सुधारने की खुलकर बात कर रहा है। हाल के महीनों में भारत और तुर्की के रिश्तों में आए तनाव के बाद अंकारा की तरफ से आए नए संकेत बताते हैं कि उसे भारत की रणनीतिक और आर्थिक ताकत का एहसास हो चुका है।
तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान का हालिया बयान इसी बदलाव की ओर इशारा करता है। उन्होंने साफ कहा कि तुर्की भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है और दोनों देशों के बीच पाकिस्तान को बाधा नहीं बनना चाहिए।
भारत से रिश्ते सुधारने की कोशिश में तुर्की
तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि केवल पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध होने की वजह से भारत को तुर्की से दूरी नहीं बनानी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी तनावपूर्ण रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और तुर्की पर पड़ रहे आर्थिक तथा रणनीतिक दबाव का परिणाम हो सकता है।
ऑपरेशन दोस्त से ऑपरेशन सिंदूर तक
फरवरी 2023 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत ने ‘ऑपरेशन दोस्त’ चलाकर तुर्की की व्यापक मदद की थी।
भारत ने:
- राहत सामग्री भेजी
- फील्ड अस्पताल स्थापित किए
- बचाव दल तैनात किए
- चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई
लेकिन बाद में भारत को तब निराशा हुई जब तुर्की ने पाकिस्तान के प्रति खुला समर्थन जारी रखा और कश्मीर जैसे मुद्दों पर इस्लामाबाद के पक्ष में बयान दिए।
पाकिस्तान के समर्थन ने बढ़ाई मुश्किलें
भारत में तुर्की को लेकर नाराजगी तब और बढ़ी जब पाकिस्तान के साथ उसके सैन्य और राजनीतिक संबंध चर्चा में आए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ रक्षा उपकरणों और ड्रोन को लेकर भी तुर्की का नाम सामने आया। इससे भारत में जनमत तेजी से तुर्की के खिलाफ हो गया।
भारतीय पर्यटकों के बहिष्कार का असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन बाजारों में से एक है। तुर्की लंबे समय से भारतीय पर्यटकों का पसंदीदा गंतव्य रहा है।
लेकिन हालिया घटनाओं के बाद:
- कई भारतीयों ने तुर्की यात्राएं रद्द कीं।
- डेस्टिनेशन वेडिंग्स कैंसिल हुईं।
- विश्वविद्यालयों के सहयोग कार्यक्रम प्रभावित हुए।
- कुछ तुर्की ब्रांडों के प्रति उपभोक्ता विरोध देखने को मिला।
इसका सीधा असर तुर्की के पर्यटन उद्योग और स्थानीय कारोबार पर पड़ा।
आर्मेनिया के साथ बढ़ा भारत का सहयोग
भारत ने हाल के वर्षों में आर्मेनिया के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत किया है।
आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है, जबकि तुर्की अजरबैजान का करीबी सहयोगी माना जाता है। ऐसे में भारत द्वारा आर्मेनिया को रक्षा उपकरण उपलब्ध कराना क्षेत्रीय समीकरणों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस रणनीति ने तुर्की को यह संदेश दिया कि दक्षिण कॉकस क्षेत्र में भारत भी प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।
साइप्रस और ग्रीस के साथ बढ़ती नजदीकी
भारत ने हाल के वर्षों में साइप्रस और ग्रीस के साथ भी अपने संबंध मजबूत किए हैं।
ये दोनों देश लंबे समय से तुर्की के साथ विभिन्न समुद्री और क्षेत्रीय विवादों में उलझे रहे हैं।
रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के बढ़ते अवसरों ने तुर्की की चिंताओं को और बढ़ाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यही कारण है कि अंकारा अब भारत के साथ संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
क्यों बदला तुर्की का रुख?
तुर्की के बदलते रुख के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं:
- भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
- भारतीय पर्यटन बाजार का महत्व
- व्यापारिक हित
- क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरण
- रक्षा सहयोग में भारत की बढ़ती भूमिका
इन सभी कारकों ने तुर्की को यह समझने पर मजबूर किया है कि भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदार से दूरी उसके हित में नहीं है।
निष्कर्ष
India Turkey Relations एक नए मोड़ पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। पाकिस्तान के साथ करीबी संबंधों के कारण पैदा हुए तनाव के बावजूद अब तुर्की भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जता रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश अपने मतभेदों को कितनी हद तक पीछे छोड़कर नए संबंधों की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
FAQs
1. तुर्की भारत से रिश्ते सुधारने की बात क्यों कर रहा है?
आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक कारणों से तुर्की भारत के साथ बेहतर संबंध चाहता है।
2. ऑपरेशन दोस्त क्या था?
2023 के भूकंप के बाद भारत द्वारा तुर्की को दी गई मानवीय सहायता और राहत अभियान।
3. भारत और तुर्की के बीच तनाव का प्रमुख कारण क्या है?
पाकिस्तान के प्रति तुर्की का समर्थन और कश्मीर मुद्दे पर उसके बयान।
4. भारत ने आर्मेनिया के साथ सहयोग क्यों बढ़ाया?
क्षेत्रीय रणनीतिक हितों और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए।

