
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 10 अप्रैल
देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा को लेकर सरकार ने बड़े बदलाव लागू किए हैं। National Highways Authority of India (NHAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय की नई व्यवस्था के तहत टोल वसूली अब पूरी तरह डिजिटल और सख्त नियमों के साथ की जा रही है।
### डिजिटल टोल सिस्टम की ओर बड़ा कदम
नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर नकद भुगतान को लगभग समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। अब वाहनों को टोल देने के लिए मुख्य रूप से *FASTag या UPI* का इस्तेमाल करना होगा। इस फैसले का उद्देश्य टोल प्लाजा पर भीड़ कम करना और सिस्टम को तेज व पारदर्शी बनाना है। ([Moneycontrol][1])
### FASTag नहीं तो देना पड़ेगा ज्यादा शुल्क
सरकार ने नियमों को और सख्त करते हुए साफ किया है कि यदि किसी वाहन में वैध FASTag नहीं है, तो उसे अधिक शुल्क देना पड़ेगा—
* नकद भुगतान पर *दोगुना टोल टैक्स*
* UPI से भुगतान करने पर लगभग *1.25 गुना शुल्क* देना होगा ([Press Information Bureau][2])
### FASTag वार्षिक पास महंगा
नए नियमों के साथ FASTag से जुड़े शुल्क में भी बदलाव किया गया है। 1 अप्रैल 2026 से FASTag वार्षिक पास की कीमत बढ़ाकर *₹3000 से ₹3075* कर दी गई है। यह पास एक साल या 200 टोल पार करने तक मान्य रहेगा। ([The Times of India][3])
### डिजिटल निगरानी और ई-नोटिस सिस्टम
नई टोल नीति में डिजिटल निगरानी को भी मजबूत किया गया है। यदि कोई वाहन बिना भुगतान के टोल पार करता है, तो उसे *ई-नोटिस* भेजा जाएगा और निर्धारित समय में भुगतान न करने पर अतिरिक्त जुर्माना लग सकता है। ([The Times of India][4])
### क्या बदलेगा आम लोगों के लिए
* अब टोल पर रुकने का समय कम होगा
* नकद लेन-देन लगभग खत्म होगा
* FASTag रखना लगभग अनिवार्य हो जाएगा
* नियम तोड़ने पर तुरंत जुर्माना
### सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से
* ट्रैफिक जाम कम होगा
* ईंधन की बचत होगी
* भ्रष्टाचार और नकद लेन-देन घटेगा
* टोल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनेगा
*निष्कर्ष:*
10 अप्रैल से लागू इन नए नियमों के बाद साफ है कि अब टोल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है। वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने FASTag को सक्रिय और रिचार्ज रखें, ताकि अतिरिक्त शुल्क और परेशानी से बचा जा सके।

