सूरीनाम पहुंचे एस जयशंकर, कैरेबियाई देशों में भारत की बढ़ती ताकत

सूरीनाम पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर, भारत-कैरेबियन रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर बुधवार को सूरीनाम पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यह दौरा भारत की कैरेबियाई देशों के साथ बढ़ती रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

तीन कैरेबियाई देशों की यात्रा के दूसरे चरण में जयशंकर ने सूरीनाम के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा की। सूरीनाम पहुंचने पर उन्होंने कहा कि वह पहली बार पारामारिबो आए हैं और दोनों देशों के बीच बातचीत को लेकर बेहद उत्साहित हैं।


भारत और सूरीनाम के रिश्ते क्यों हैं खास?

भारत और सूरीनाम के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार सूरीनाम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिन्हें गिरमिटिया समुदाय कहा जाता है।

19वीं सदी में हजारों भारतीय मजदूर अनुबंध के तहत कैरेबियाई देशों में काम करने गए थे और बाद में वहीं बस गए। आज वही समुदाय भारत और सूरीनाम के रिश्तों की मजबूत कड़ी बना हुआ है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अब सांस्कृतिक जुड़ाव को आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


कैरेबियाई देशों में भारत की बढ़ती सक्रियता

जयशंकर का यह दौरा केवल औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भारत की व्यापक वैश्विक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सूरीनाम के बाद वह त्रिनिदाद और टोबैगो भी जाएंगे। इससे पहले उन्होंने जमैका का दौरा किया था, जहां कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

भारत और जमैका के बीच डिजिटल हेल्थ, शिक्षा, कृषि और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।


जमैका को भारत की बड़ी मदद

भारत ने जमैका को स्वास्थ्य और आपदा राहत सहायता के तहत डायलिसिस यूनिट, मछली पकड़ने वाली नावें और जीपीएस उपकरण देने का फैसला किया है।

यह सहायता पिछले साल आए तूफान के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में मदद के लिए दी जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत अब विकास सहयोग और मानवीय सहायता के जरिए ग्लोबल साउथ देशों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।


संयुक्त राष्ट्र और आतंकवाद पर भी बनी सहमति

जयशंकर की यात्रा के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता के लिए जमैका के समर्थन की सराहना की।

दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति जताई।

यह संकेत माना जा रहा है कि भारत अब छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ अपने रिश्तों को नई ऊंचाई देना चाहता है।


प्रवासी भारतीयों से भी मिले जयशंकर

विदेश मंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान प्रवासी भारतीय समुदाय से मुलाकात की और एक विश्वविद्यालय कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया।

उन्होंने भारतीय मूल के लोगों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी समुदाय भारत और दुनिया के बीच एक मजबूत पुल का काम करता है।


क्यों अहम है यह दौरा?

विशेषज्ञों के मुताबिक कैरेबियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंध कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं:

  • ग्लोबल साउथ में भारत का प्रभाव बढ़ेगा
  • ऊर्जा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मजबूती मिलेगी
  • संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत को समर्थन मिलेगा
  • भारतीय संस्कृति और प्रवासी संबंधों को नई पहचान मिलेगी

निष्कर्ष

एस जयशंकर का सूरीनाम और कैरेबियाई देशों का दौरा भारत की बदलती विदेश नीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

भारत अब केवल बड़ी शक्तियों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि छोटे और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ भी अपने संबंध मजबूत कर रहा है।

गिरमिटिया इतिहास से शुरू हुए रिश्ते अब व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और वैश्विक साझेदारी के नए दौर में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं।


FAQs

एस जयशंकर किस दौरे पर सूरीनाम पहुंचे हैं?

वह तीन कैरेबियाई देशों की यात्रा के दूसरे चरण में सूरीनाम पहुंचे हैं।

भारत और सूरीनाम के संबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं?

दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रवासी भारतीय समुदाय के मजबूत संबंध हैं।

भारत ने जमैका को क्या सहायता दी?

भारत ने डायलिसिस यूनिट, मछली पकड़ने वाली नावें और जीपीएस उपकरण देने का निर्णय लिया है।

जयशंकर आगे किस देश का दौरा करेंगे?

सूरीनाम के बाद वह त्रिनिदाद और टोबैगो जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *