सोनम वांगचुक और सीजेपी में बढ़ता फ़ासला
सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन तोड़ा. सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था? इसके अलावा भी दोनों की सोच में फ़र्क़ साफ़ दिख रहा है.
क्या है सोनम वांगचुक की मांगें
सोनम वांगचुक ने अपने अनशन के दौरान कई मांगें रखी थीं. उन्होंने कहा था कि उनकी मांगें पूरी होने पर ही वे अपना अनशन तोड़ेंगे.
सीजेपी का रुख़
सीजेपी ने सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर अपना रुख़ साफ़ किया है. पार्टी के नेताओं ने कहा है कि वे वांगचुक की मांगों का समर्थन करते हैं.
लेकिन सोनम वांगचुक के अनशन को तोड़ने के लिए जेपी नड्डा के हाथों जाने से सीजेपी और वांगचुक के बीच फ़ासला बढ़ गया है. यह सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था?
सोनम वांगचुक और सीजेपी के बीच फ़ासला
सोनम वांगचुक और सीजेपी के बीच फ़ासला बढ़ने से कई सवाल उठ रहे हैं. यह सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था?
इसके अलावा भी दोनों की सोच में फ़र्क़ साफ़ दिख रहा है. सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन तोड़ा है, जो कि सीजेपी के नेता हैं.
यह फ़ासला बढ़ने से सोनम वांगचुक और सीजेपी के बीच संबंधों में खटास आ सकती है. यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है.
