
चेन्नई, 7 अप्रैल
तमिलनाडु के बहुचर्चित कस्टोडियल डेथ मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को दो लोगों की हत्या के दोष में फांसी की सज़ा सुनाई है। अदालत ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” मामला बताते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध में उम्रकैद भी पर्याप्त नहीं है।
यह मामला वर्ष 2020 में तूतीकोरिन (थूथुकुडी) जिले में हुई घटना से जुड़ा है, जहां लॉकडाउन के दौरान दुकान खोलने के आरोप में पिता-पुत्र पी. जयराज और जे. बेनिक्स को पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि थाने में उन्हें बुरी तरह पीटा गया, जिसके चलते दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था।
अदालत द्वारा जिन 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया, उनमें इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर आर. रघुगणेश सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। सभी को अपहरण, मारपीट, साक्ष्य मिटाने और हत्या के आरोप में दोषी पाया गया। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने अपनी वर्दी और पद का दुरुपयोग करते हुए मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया।
पीड़ित परिवार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें लंबे समय के बाद न्याय मिला है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि घटना के बाद से ही वे न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे और अब अदालत के फैसले से उन्हें कुछ राहत मिली है, हालांकि उनका दर्द कभी कम नहीं हो सकता।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस पेश किया। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था में लोगों के विश्वास को कमजोर करती हैं, इसलिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देना जरूरी है।
फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि दोषी पुलिसकर्मी इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने इसे न्याय की दिशा में एक अहम कदम बताया है।

