नीरव मोदी को बड़ा झटका: लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में सुनाया फैसला
लंदन हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नीरव मोदी बैंक ऑफ इंडिया को 11.5 मिलियन डॉलर (ब्याज सहित) से अधिक की राशि चुकाने के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं।
यह मामला दुबई स्थित फायरस्टार डायमंड FZE को दिए गए ऋण पर नीरव मोदी द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी (Personal Guarantee) से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
बैंक ऑफ इंडिया ने वर्ष 2018 में नीरव मोदी के खिलाफ यह वसूली मामला दायर किया था।
बैंक का कहना था कि फायरस्टार डायमंड FZE को दिए गए ऋण की व्यक्तिगत गारंटी नीरव मोदी ने दी थी। हालांकि नीरव मोदी ने अदालत में इस गारंटी की वैधता को चुनौती दी थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस साइमन टिंकलर ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाया।
अदालत ने कहा कि:
- बैंक द्वारा भेजी गई डिमांड नोटिस वैध थी।
- व्यक्तिगत गारंटी भारतीय कानून के तहत वैध और लागू करने योग्य है।
- नीरव मोदी बैंक के प्रति कानूनी रूप से उत्तरदायी हैं।
कोर्ट ने मूल बकाया राशि 4.1 मिलियन डॉलर के साथ ब्याज जोड़ते हुए कुल देय राशि लगभग 11.5 मिलियन डॉलर बताई। साथ ही अदालत ने कहा कि मार्च 2026 के बाद भी इस राशि पर ब्याज जुड़ता रहेगा।
यह फैसला PNB घोटाले से अलग
बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पेश वकीलों ने स्पष्ट किया कि यह मामला पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले से अलग है।
यह केवल एक वाणिज्यिक बैंकिंग रिकवरी (Commercial Banking Recovery) से जुड़ा मामला है और अदालत ने PNB धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
नीरव मोदी अभी भी ब्रिटेन की जेल में
55 वर्षीय नीरव मोदी फिलहाल ब्रिटेन की जेल में बंद हैं और भारत प्रत्यर्पण (Extradition) के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
भारत में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जिनमें शामिल हैं:
- पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामला
- धन शोधन (Money Laundering) मामला
- सबूतों और गवाहों से कथित छेड़छाड़ से जुड़े आरोप
अप्रैल 2021 में तत्कालीन ब्रिटिश गृह सचिव ने उनके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।
कानूनी प्रक्रिया में आईं चुनौतियां
सुनवाई के दौरान नीरव मोदी ने कई बार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सुनवाई टालने की मांग की।
उन्होंने गंभीर दृष्टि संबंधी समस्या, अवसाद और जेल की परिस्थितियों का उल्लेख किया।
अदालत ने यह भी माना कि जेल प्रशासन की कुछ प्रशासनिक त्रुटियों के कारण केस दस्तावेजों के स्थानांतरण में देरी हुई, जिसके लिए संबंधित अधिकारियों ने बाद में माफी भी मांगी।
आगे क्या होगा?
नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण रोकने के लिए ब्रिटेन की अदालतों में कई याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने अब यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) का भी दरवाजा खटखटाया है, जहां मामला अभी विचाराधीन है।
निष्कर्ष
लंदन हाई कोर्ट का यह फैसला नीरव मोदी के लिए एक और बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया की मांग को सही ठहराते हुए व्यक्तिगत गारंटी को वैध माना है। हालांकि भारत प्रत्यर्पण और अन्य आपराधिक मामलों पर कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है।
FAQs
नीरव मोदी को कितना भुगतान करना होगा?
अदालत ने ब्याज सहित लगभग 11.5 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह मामला किससे जुड़ा है?
यह बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दिए गए ऋण पर व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा वसूली मामला है।
क्या यह PNB घोटाले का फैसला है?
नहीं। यह फैसला केवल बैंक ऑफ इंडिया के रिकवरी केस से संबंधित है।
नीरव मोदी फिलहाल कहां हैं?
वह ब्रिटेन की जेल में बंद हैं और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
क्या भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी हो गई है?
नहीं। प्रत्यर्पण से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है।

